उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड

   


उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम लि०

     प्रदेश में पिछड़े वर्गो के सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा निर्गत शासनादेश संख्या-3459/  26-3-89-9(51) / 89 दिनांक 20  सितम्बर, 1989 द्वारा 10 करोड़ रूपये की अधिकृत अंशपूंजी से उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम लि० की स्थापना की स्वीकृति प्रदान की गयी। शासन द्वारा निगम की अधिकृत अंशपूंजी रू० 10.00 करोड़ से बढ़ा कर रू० 30.00 करोड़ कर दी गयी है। उत्तर प्रदेश शासन के उपर्युक्त आदेशों के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड का कम्पनी के रूप‍ में निगमन कम्पनी रजिस्ट्रार उत्तर प्रदेश , कानुपर के प्रमाण पत्र संख्या 20-13091/91 दिनांक 26 अप्रैल, 1991 द्वारा कराया गया।


संगठनात्मक ढांचा

     निगम के कार्यो को सुचारू रूप से चलाने हेतु मुख्यालय स्तर पर प्रबंध निदेशक, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी, प्रोजेक्ट मैनेजर तथा कम्पनी सचिव के पद सृजित किये गये हैं। इसके अतिरिक्त अनुभाग प्रभारी के साथ-साथ लिपिकीय पदों का सृजन किया गया है। शासन द्वारा मण्डल स्तरपर उपनिदेशक पिछड़ा वर्ग कल्याण को पदेन मण्डलीय प्रबन्धक, उ०प्र० पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास  निगम  तथा जनपद स्तर पर जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी को निगम का पदेन जिला प्रबंधक घोषित किया गया है।


उद्देश्य

     उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम लि० की स्थापना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अधिसूचित पिछड़े वर्ग के बेरोजगार युवक / युवतियों को विभिन्न व्यवसाय / उद्यम / उद्योग स्थापित करने हेतु आसान ब्याज दर पर मार्जिन मनी, टर्मलोन, शैक्षिक ऋण, न्यू स्वर्णिमा तथा सूक्ष्म क्रेडिट वित्त पोषण योजनाओं के अन्तर्गत ऋण उपलब्ध कराकर उनको सामाजिक, आर्थिक  एवं शैक्षिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।


उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम द्वारा संचालित योजनाएं

     उत्तर प्रेदश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम लि०, राष्ट्रीय पिछड़ा  वर्ग वित्त एवं विकास निगम नई दिल्ली की चैनलाइजिंग एजेंसी (कार्यकारी शाखा) के रूप में र्कायरत है। निगम द्वारा राष्ट्रीय निगम से आसान ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर निम्नलिखित ऋण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के अन्तर्गत लाभार्थियों का चयन जिलाधिकारी अथवा उनके द्वारा नामित मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाता है

1.    मार्जिन मनी ऋण योजना
इस योजना  अर्न्तगत कृषि, दस्तकारी, पारम्परिक व्यवसाय, तकनीकी व्यवसाय, लघु एवं कुटीर उद्योग तथा अन्य सामान्‍य व्यवसायों हेतु 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर ऋण दिया जाता है। इस योजना के अन्तर्गत परियोजना लागत का 50 प्रतिशत ऋण बैंक द्वारा स्वीकृत किया जाता है जिस पर बैंक में प्रचलित दर से ब्याज लिया जाता है।

2.    टर्मलोन ऋण योजना
इस योजना के अन्तर्गत कृषि, दस्तकारी, पारम्परिक व्यवसाय, तकनीकी व्यवसाय, लघु एवं कुटीर उद्योग तथा अन्य सामान्य व्यवसायों हेतु 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर ऋण दिया जाता है।

3.    शैक्षिक ऋण योजना
निगम द्वारा पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों, जो गरीबी रेखा अथवा दोहरी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे है, को व्यावसायिक, तकनीकी शिक्षण तथा प्रशिक्षण हेतु शैक्षिक ऋण प्रदान किये जाने की योजना संचालित की जा रही है, जिसके अन्तर्गत छात्र / छात्राओं को रू० 75000/- प्रतिवर्ष 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर पर ऋण उपलब्ध कराये जाने का प्राविधान किया गया है। पूरे पाठ्यक्रम में अधिकतम रू० 3.00 लाख तक ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है। इस ऋण हेतु आवेदक / विद्यार्थी का अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (ए०आई०सी०टी०ई०) और भारतीय चिकित्सा परिषद जैसी भी स्थिति हो, के द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश प्राप्त होना चाहिए। ऋण का पुनर्भुगतान  कोर्स पूर्ण होने के 6 माह बाद अथवा संबधित विद्यार्थी द्वारा सेवा प्राप्त करने या स्व रोजगार प्रारम्भ करने, जो भी पहले हो, से प्रारम्भ होगा। कुल पुनर्भुगतान अवधि अधिकतम 5 वर्ष की होगी जो कि मासिक किश्तों में होगी।

4.    न्यूस्वर्णिमा योजना
पिछड़े वर्ग की गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना जागृत करने हेतु निगम द्वारा उनके लिए एक विशेष योजना वर्ष  2001-2002 से न्यू स्वर्णिमा योजना' संचालित की गई है। महिलाओं को न्यू स्वर्णिमा योजना के अन्तर्गत समाहित परियोजना में 50000 /- रू तक लागत की परियोजनाओं में 4 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण स्वीकृत किया जाता है। न्यू स्वर्णिमा योजना का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है:-
 1.  महिला लाभार्थी को अपना अंश विनियोजित करने की आवश्यकता नहीं है।
 2.  इस योजना के अन्तर्गत अधिकतम ऋण रू० 50000 /- प्रति लाभार्थी है।.
 3.  ऋण के भुगतान की अवधि निगम की सामान्य ऋण योजना में पुनर्भुगतान की अधिकतम अवधि 5 वर्षं से 2 वर्ष अधिक रखी गयी है।
 4.  ग्रामीण प्रार्थीके परिवार की वार्षिक आय 20000 /- तथा शहरी प्रार्थी के परिवार की वार्षिक आय रू० 27500 /- से अधिक नहीं होनी चाहिए।

5.   सूक्ष्म क्रेडिट वित्त पोषण ( माइक्रो क्रेडिट फाइनेंसिंग)
उ०प्र० पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम द्वारा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, नई दिल्ली के सहयोग से सूक्ष्म क्रेडिट वित्त पोषण ( माइक्रो क्रेडिट फाइनेंसिंग) ऋण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना  के अन्तर्गत पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों को लघु उद्योग स्थापित करने हेतु ऋण स्वीकृत किया जाता है। इस योजना में ऋण लाभार्थियों के स्वयं सहायता समूह को उपलब्ध कराया जाता है। उक्त योजना की महत्‍वपूर्ण विशेषताएं निम्नवत है:-
1.   ऋण की अधिकतम सीमा    प्रति लाभर्थी रू० 25000 /-
2.    ऋण की अदायगी की सीमा   अधिकतम 18 माह
3.    ब्याज दर 5 प्रतिशत वार्षिक


निगम से ऋण प्राप्त करने हेतु पात्रता

     उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग एवं विकास निगम लि० द्वारा संचालित उक्त योजनाओं का लाभ प्राप्त करने हेतु निम्नलिखित व्यक्ति पात्र होगें:-
1.  जो उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हो,
2.  जिन्होने 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो, परन्तु प्रतिबन्ध यह है कि ऐसे आवेदकों के प्रार्थना पत्र पर वरीयता के आधार पर पहले विचार किया जायेगा, जिसने राजकीय सेवा हेतु अधिकतम आयु पूर्ण कर ली हो, अर्थात राजकीय सेवा हेतु अधिकतम आयु के आधार पर अर्ह न हो, परन्तु अधिकतम 50 वर्ष से अधिक न हो।
3.  जिसके पास जीवन यापन का कोई साधन न हो।
4.  जो उत्तर प्रदेश शासन द्वारा अधिसूचित पिछड़े वर्ग का सदस्य हो।
5.  स्नातक स्तर की शैक्षिक अर्हता (सामान्य / तकनीकी) रख्नने वाले अभ्यर्थियों को वरीयता दी जायेगी।
6.  संबंधित व्यवसाय / उद्योग में तकनीकी अनुभव प्राप्त व्यक्ति को वरीयता दी जायेगी।
7.  जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहा हो अर्थात वर्तमान में समस्त स्रोतों से वार्षिक आय निम्न प्रकार हो:-
      - लाभार्थी की वार्षिक पारिवारिक आय रू० 20000 /- ग्रामीण क्षेत्र में तथा रू० 27500 /- शहरी क्षेत्र में।
     - उक्त आय सीमा के अर्न्तगत लाभार्थी उपलब्ध न होने की दशा में ही दोहरी गरीबी रेखा के लाभार्थियों को आच्छादित किया जायेगा -    शहरी क्षेत्र में रू० 55000 /- एवं ग्रामीण क्षेत्र में रू० 40000 /- वार्षिक।


निगम की योजनाओं में वित्त पोषण

क्र०सं० योजना का नाम राष्ट्रीय निगम अंश  राज्य निगम अंश लाभार्थी बैंक - ऋण
1 मार्जिन मनी ऋण योजना 40 प्रतिशत 5 प्रतिशत 5 प्रतिशत 50 प्रतिशत
2 टर्म लोन योजना 85 प्रतिशत 10 प्रतिशत 5 प्रतिशत -
3 शैक्षिक ऋण योजना 90 प्रतिशत 5 प्रतिशत 5 प्रतिशत -
4 न्यू स्वर्णिमा योजना 95 प्रतिशत 5 प्रतिशत - -
5 सूक्ष्म क्रेडिट वित्त पोषण  90 प्रतिशत 5 प्रतिशत 5 प्रतिशत -

 


आवेदन पत्र       
     ऋण प्राप्त करने हेतु निर्धारित प्रारूप पर आवेदन  करना होगा। आवेदन पत्र प्रत्येक जनपद के जिला प्रबंधक/ पिछड़ा वर्ग कल्याण कार्यालय अथवा निगम मुख्यालय से नि:शुल्क प्राप्त किया जा सकता है। ऋण हेतु आवेदन पत्र संबधित जनपद के जिला प्रबंधक कार्यालय में जमा किया जा सकता है।

जिला चयन समिति 
     निगम की योजना के अन्तर्गत लाभार्थी पहचान एवं चयन का कार्य  जिलाधिकारी अथवा उनके द्वारा नामित मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित चयन समिति में किया जाता है। वर्ष 1997-98 में शासनादेश द्वारा उक्त चयन समिति का पुनर्गठन किया गया है। पुर्नगठित जिला चयन समिति निम्न प्रकार है:-

 

1

 जिलाधिकारी अथवा उनके द्वारा नामित अधिकारी

अध्यक्ष
2  मण्डलीय उपनिदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण उपाध्यक्ष
3  निगम मुख्यालय द्वारा नामित एक गैर सरकारी सदस्य सदस्य
4  लीड बैंक अधिकारी सदस्य
5  जिला समाज कल्याण अधिकारी सदस्य
6  अपर जिला विकास अधिकारी ( स०क०) सदस्य
7  जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सदस्य / सचिव

 

ऋण अदायगी
     ऋण की अदायगी 60 बराबर मासिक किश्तो में की जानी है। नियमित ऋण की अदायगी करने पर 0.5 प्रतिशत की छूट प्रदान की जायेगी तथा नियमित भुगतान न करने पर  6 प्रतिशत वार्षिक दर से दण्ड़ ब्याज लिया जायेगा।

ऋण का उपयोग
     लाभार्थी द्वारा ऋण का उपयोग यदि उस कार्य हेतु नही किया जाता है, जिसके लिए ऋण प्राप्त किया है तो ऋण की धनराशि पर  12 प्रतिशत की दर से ब्याज लिया जायेगा तथा बकाया धनराशि की एकमुश्त वसूली की जायेगी।

बकाया ऋण की वसूली

     ऋण गृहीता द्वारा ऋण का भुगतान न करनेकी दशा में बकाया ऋण की वसूली उ०प्र० लोकधन(देयों) की वसूली अधिनियम 1972 के अर्न्तगत सक्षम अधिकारी द्वारा वसूली प्रमाण पत्र (रिकवरी सर्टीफिकेट) जारी कर किये जाने का प्राविधान है।

अनुदान

     निगम द्वारा संचालित मार्जिन मनी, टर्मलोन, न्यू स्वर्णिमा, सूक्ष्म क्रेडिट वित्त पोषण व शैक्षिक ऋण योजना के अन्तर्गत स्वीकृत ऋण पर कोई अनुंदान नहीं है।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के अनुदान से संचालित प्रशिक्षण योजना के उद्देश्य

     लाभार्थियों को उनके परम्परागत, तकनीकी कार्यो और उद्यमों हेतु प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हे उनके कार्य के योग्य एवं निपुण बनाना निगम की इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। पिछड़े वर्ग के पात्र व्यक्तियों के कौशल विकास हेतु राष्ट्रीय निगम द्वारा प्रदत्त अनुदान से यह निगम उन्हे तकनीकी एवं उद्यम से संबधित प्रशिक्षण प्रदान करताहै। प्रशिक्षण  की समाप्ति के उपरान्त प्रशिक्षण प्राप्तकर्ता निगम की ऋण योजनाओं के अन्तर्गत अपना कार्य आरम्भ करने हेतु ऋण सहायता प्राप्त कर सकता है।

     1. पात्रता:- केन्द्र अथवा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित पिछड़े वर्ग के ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय ग्रामीण क्षेत्र में रू० 40000 /- तथा शहरी क्षेत्र में रू० 55000 /-से अधिक नहीं हो, इस योजना के पात्र हैं।

     2.  प्रशिक्षण की अवधि:- तीन दिन से तीन माह